बिहार के भोजपुर जिले में रामायण कालखण्ड से सम्बंधित दो प्रमुख धार्मिक स्थल हैं,जिसमे प्रतिवर्ष लाखो की संख्या में होती है श्रद्धालुओं की भीड़

*बिहार के भोजपुर जिले में रामायण कालखण्ड से सम्बंधित दो प्रमुख धार्मिक स्थल हैं,जिसमे प्रतिवर्ष लाखो की संख्या में होती है श्रद्धालुओं की भीड़*

अजीत कुमार पांडे /भोजपुर 07 अगस्त 2023. वैसे तो भोजपुर ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण बिहार में ही कई ऐसे धार्मिक स्थल विराजमान है जिनका संबंध रामायण कालखण्ड से हैं।वैसे में अगर भोजपुर जिले की बात करे तो यहां अभी तक ज्ञात जानकारी के अनुसार दो ऐसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं जिनका संबंध भगवान श्री राम से संबंधित त्रेता युग से हैं।इसी में से एक है सिद्धनाथ मंदिर आरा जबकि दूसरा है जगतमाता काली धाम फरना ।

बात करते है श्री जगतमाता काली धाम फरना की जिसकी जानकारी वहां के स्थानीय निवासी अजित कुमार पांडेय ने दी हैं।

स्थानीय लोगो एवं प्राप्त मान्यताओं के अनुसार जब भगवान श्री राम,भ्राता लक्ष्मण और गुरु विश्वामित्र के साथ बक्सर से ताड़का का वध करके और अहिल्या का उद्धार करके गंगा के किनारे वाले मार्ग से शिव धनुष उठाने के निमित्त जनकपुर जा रहे थे तो इसी क्रम में भगवान श्री राम ने कार्य सिद्धि के लिए गंगा पार करने से पूर्व वर्तमान आरा में भगवान सिद्धनाथ के रूप में महादेव की पूजा अर्चना की तबसे आजतक वह स्थान सिद्धनाथ मंदिर के रूप में और जहां भगवान श्री राम ने देवी माता के नवों पिण्डियों की पूजा उस समय की गंगा के लगभग किनारे बसे वर्तमान आरा-बड़हरा मुख्य मार्ग पे स्थित फरना ग्राम में की जो स्थान आज जगतमाता काली धाम फरना के रूप में विख्यात है।

उस समय यह स्थान घनघोर जंगलों से घिरा था तथा गंगा का मार्ग वर्तमान से कई कोस दक्षिण की तरफ था।फरना स्थित जगतमाता के रूप में देवी के नवों पिण्डियों की पूजन करके लगभग इसी सीध से भगवान श्री राम,भ्राता लक्ष्मण और गुरु विश्वामित्र ने गंगा पार किया था जिसका रामचरितमानस में स्पष्ट जिक्र किया हुआ हैं।

“चले राम लक्ष्मण मुनि संगा,गए जहां जग पावनी गंगा”

 

अजित कुमार पाण्डेय ने बताया कि लोगो मे ऐसी मान्यता है कि भगवान राम ने इसी जगतमाता काली धाम के स्थान पे नवों देवी रूपो की पूजा करके और अपनी कार्य सिद्धि के लिए देवी माता से आशीर्वाद लेकर जनकपुर गएँ और वहां पे वे महान शिव धनुष उठाने में सफल हुए तथा उसके बाद सीता जी से शादी सम्पन्न हुआ।

इस मान्यता के कारण आज भी दूर दूर से बड़ी संख्या में लोग यहां शादी होने की मनोकामना लेकर भी आते है और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण भी होती हैं। यह स्थान मनोकामना पूर्ति धाम के रूप में भी विख्यात हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पे अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए आते है।

मंदिर जीर्णोद्धार की जानकारी देते हुए अजित कुमार पाण्डेय ने बताया कि हाल के दिनों में श्री जगतमाता काली भवन को स्थानीय ग्रामीणों द्वारा भव्य जीर्णोद्धार किया गया है जिसकी कई वस्तु विशेषताएं ज्ञात हैं। यह मंदिर अभी तक के ज्ञात जानकारी के अनुसार बिहार का दूसरा सबसे ऊंचा देवी माता का मंदिर है जिसकी ऊंचाई लगभग 111 फ़ीट हैं।

मंदिर का निर्माण नागर एवं वेसर शैली में किया गया है जिसके लिए दक्षिण भारतीय शिल्पकारों को कार्य पे लगाया गया था।यह मंदिर अंदर से पूरा खुला हुआ गुम्बदाकार बना हैं।शुद्ध लाल चंदन से निर्मित विशाल दरवाजा है जो मंदिर की शोभा की सुशोभित करता हैं।आरा-बड़हरा मुख्य मार्ग पे ही अवस्थित होने के कारण इस मंदिर तक श्रद्धालुओं का पहुँचना आसान हो जाता हैं ।

श्रद्धालु किसी भी मौसम में आसानी से नजदीजि रेलवे स्टेशन आरा से पहुँच सकते हैं।बताते चले कि फरना गांव और भी कई प्राचीन मंदिर/मठों से सुशोभित है जिसमे की मुख्य रोड पे हीं कुटिया के नाम से प्रसिद्ध महावीर मंदिर,भगवान शिव के लिए समर्पित गाँव के बीच मे विशाल मठ,भगवान सूर्य को समर्पित मुख्य रोड पे भव्य सूर्य मंदिर आदि प्रमुख हैं।

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